Sunday, 12 August 2018

साहब अब यहाँ इंसान शरीर से नहीं ज़हन से अपाहिज़ होता है - नशिब सैन

KEEP GOING AND KEEP SMILING
नज़्म ग़ज़ल और शायरी नशिब सैन 

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Pata Nahi - Nashib Sain